वास्तु शास्त्र एक प्राचीन भारतीय शास्त्र है जो भवन निर्माण और इनसे संबंधित सभी कार्यों के लिए दिशानिर्देश प्रदान करता है। यह शास्त्र प्राचीन समय से ही अस्तित्व में है और पुराने समय से अधिकांश वास्तुकारों द्वारा इसका पालन किया जाता था। इस विद्या के अंतर्गत वास्तुकला, स्थापत्य और वास्तुविद्या जैसे क्षेत्रों में भवन निर्माण के नियम और निर्देश शामिल हैं। वास्तु शास्त्र को आमतौर पर “वास्तु” के नाम से जाना जाता है। यह एक ऐसा शास्त्र है जो मनुष्य के निवास स्थान की योजना, निर्माण और सजावट के बारे में ज्ञान प्रदान करता है। वास्तु शास्त्र का मुख्य उद्देश्य संतुलन, सुख, और शांति को बढ़ाना है जो एक व्यक्ति के और उसके आसपास के पर्यावरण में उपस्थित होती हैं। इसका मुख्य ध्येय सुख, समृद्धि और कार्यक्षेत्र में सफलता को प्राप्त करने के लिए एक शुभ और सुन्दर वातावरण बनाना है। मान्यता है कि यदि निवास स्थान संतुलित होता है तो जीवनशैली, स्वास्थ्य, समृद्धि में भी सुधार होता है। वास्तुशास्त्र किसी निर्माण से सम्बंधित चीज़ों के शुभ अशुभ फलों को बताता है। यह किसी निर्माण के कारण होने वाली समस्याओं के कारण और निवारण को भी बताता है। इस पुस्तक में वास्तु शास्त्र के कुछ पहलुओं पर विचार किया गया है। कुछ और पहलुओं की चर्चा हम अगली पुस्तकों में करेंगे।
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Yes — the book explains Vastu principles and is suited for homeowners, architects and beginners interested in Vastu.