लबों के मयकदे से
अपनी खूबियों और कमियों के साथ एक और गजल संग्रह 'लबों के मयकदे से' लेकर आपकी अदालत में उपस्थित हूँ, निर्णय आपके हाथ में है। इस पुस्तक का नाम गजल संख्या 88 के मतले से लिया गया है जो यूँ है - मयकदे हम चल दिए पीने-पिलाने के लिए ये लबों का मयकदा है मुस्कुराने के लिए प्रस्तुत संग्रह में मेरी कुछ चुनिंदा गजलें हैं जिनमें से अधिकतर प्रकाशित हैं और बहुत सारी पुरस्कृत हैं । एक गजल (संख्या 76) विश्व की पहली गृजुल है जो पहेली के रूप में है| आपकी दुआओं से इस गृजुल के लिए मुझे वर्ल्ड रिकॉर्ड - 2025 से सम्मानित किया गया है ॥ प्राय: अधिकांश शायर अपनी ग़ज़लों के साथ शब्दार्थ और मात्रा गणना नहीं देते। मेरा अनुभव बताता है कि विशेष रुप से हिंदी भाषी उर्दू शब्दों का अर्थ न समझ पाने के कारण गजल का वास्तविक आनंद नहीं उठा पाते | मात्रा गणना मैं नवोदित शायरों के लिए देता हूँ. ताकि इसके द्वारा वे समझ सकें कि कहाँ कैसे मात्रा गिराई जाती है। यह उनके लिए एक प्रकार का मात्रा गणना का अभ्यास करने का साधन बन जाता है। यदि मैं फिर से आपका वही प्यार वही मोहब्बत पाने में सफल रहा तो मैं स्वयं को संसार का सबसे भाग्यशाली व्यक्ति समझूँगा।