दिल से दिल तक
सुधि पाठकों, मेरी ग़ज़ल पर लिखी गई तीन पुस्तकों को आपने हाथों-हाथ लिया और प्रतिक्रियाऍं भी अच्छी मिली। इसी से उत्साहित होकर चौथी पुस्तक आपकी ख़िदमत में पेश कर रहा हूँ। हौसला-अफ़ज़ाई के लिए आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया। जैसा कि आप जानते हैं मेरी ग़ज़लें नवोदित शायरों और विशेष रूप से हिंदी-भाषियों के लिए होती हैं। शायद इसीलिए मेरी पुस्तकों में रिवायत से हटकर ग़ज़ल के वज़्न के साथ ही कठिन उर्दू शब्दों के विस्तृत अर्थ भी दिए जाते हैं। आमतौर पर ग़ज़लों के शीर्षक नहीं दिए जाते, जब कि नज़्मों में शीर्षक आवश्यक हैं। परंतु मैंने लीक से हटकर ग़ज़लों के शीर्षक भी दिए हैं ताकि पाठक को अपनी मनपसंद ग़ज़ल ढूँढने में सुविधा हो। ग़ज़ल का मूल विषय सदा से ही इश्क़ रहा है फिर यह इश्क-मजाज़ी (लौकिक प्रेम) हो या हक़ीक़ी (ईश्वरीय)। जब तक इंसान इस धरती पर ज़िंदा है तब तक इश्क़ भी रहेगा। क्योंकि इश्क़ कभी मरता नहीं, अतः स्वाभाविक है कि ग़ज़ल की विधा भी सदा ज़िंदा रहेगी। यह बात और है कि बदलते परिप्रेक्ष्य में ग़ज़ल का स्वरूप अधिक विस्तृत हो गया और आज मिलन-विरह, शिकवे-शिकायत के अतिरिक्त इसमें सामाजिक और राजनीतिक तथा अन्य विषयों का समावेश भी हो गया है। मैं मुख्य रूप से श्रृंगार रस का शायर हूँ, इसके अतिरिक्त अन्य विषयों पर भी लिखा है पर वहाँ मैं इतना सहज महसूस नहीं करता। मेरा प्रयत्न रहता है कि ग़ज़ल में समाचार-वाचक की तरह सीधी-साफ बात कहने के बजाय उसे इशारों में कहा जाए। इस प्रकार से कई बातें जो साफ़ तौर पर नहीं कही जा सकती, इशारों के माध्यम से वे सहज ही कह दी जाती हैं। साथ ही एक शेर के कितने ही अर्थ निकल आते हैं। पाठक यह अर्थ अपनी मन-स्थिति के अनुसार लगाते और समझते हैं। परंतु इशारों को समझना तभी संभव है जब ग़ज़ल की गहराई में जाकर मनन किया जाए। इसी पुस्तक की एक नज़्म ‘मैं हूँ ग़ज़ल’ से दो मिसरे देखिए - बिम्ब रूपक व उपमा के हीरों जड़ी इक सुमन से कई गंध देती हुई तो मित्रों एक सुमन से कई गंध प्राप्त करने के लिए ग़ज़लों को ध्यान से पढ़िए और आनंद प्राप्त कीजिए।
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This book is especially intended for readers interested in Hindi-Urdu ghazal and for नवोदित शायरों who want to understand ghazal writing, weight (वज़्न), difficult Urdu words and the deeper meaning of poetic expression.