Aasman Ke Parindey

आसमां के परिंदे

प्यार एक ऐसा शब्द है जो खुद में अपूर्णता लिए हुए इंसान को पूर्ण बना देता है। प्यार में डूबा इंसान अपने अंदर एक अलग ही परिवर्तन महसूस करता है जो सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही हो सकती है। प्यार एक ऐसा अहसास है जिसका मतलब केवल प्रेम करने से ही नहीं होता अपितु गुस्सा या डाँटना भी प्यार करने का प्रतिरूप होता है। जिस तरह एक माँ अपनी संतान को गलत करने से रोकने के लिए उस पर गुस्सा करती है या उसे फटकार लगाती है तो, इसका मतलब ये नहीं होता कि वो अपनी संतान से प्यार नहीं करती है। एक इंसान को सही दिशा दिखाने के लिए प्यार और डाँट दोनों की बराबर जरूरत होती है। किसी एक भाव को ही दिखाने से बात बिगड़ सकती है और इस बात का इंसान के व्यक्तित्व पर बहुत गहरा असर पड़ता है। ठीक इसी तरह ये प्रेम कहानी है सिमरन मल्होत्रा और अभिराज उपाध्याय की । सिमरन दिल्ली के एक पूर्ण रूप से सम्पन्न परिवार से है, वही अभिराज चेन्नई के एक अविकसित गाँव वेदन्तिपुरम में पला बढ़ा है। जहाँ सिमरन तमाम ऐशोआराम में पली बढ़ी, पढ़ी लिखी, नाजुक, मासूम, गैरजिम्मेदार और बेपरवाह लड़की है, वही अभिराज पढ़ा लिखा, समझदार, जिम्मेदार, कठोर व्यक्तित्व वाला, जिसके लिए उसका परिवार और गाँव ही सब कुछ है। दोनों का नेचर एक दूसरे से बिल्कुल जुदा है, एक पूरब है तो दूसरा पश्चिम । ये दोनों कैसे एक दूसरे से मिलते हैं और कैसे अभिराज का कठोर स्वभाव सिमरन के जीने का नजरिया इतना बदल देता है कि वो एक जिम्मेदार इंसान बन जाती है और अभिराज से नफ़रत करने लगती है। इस नफ़रत को अभिराज कैसे प्यार में बदलता है ये जानने के लिए पढ़िए आसमां के परिंदे।

ISBN: 978-81-948859-3-1
Genre: उपन्यास (प्रेम कहानी)
Language: हिंदी
Pages: 599
Size: 5.75x8.75
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